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वैर।ग्रामीण क्षेत्र से निकली प्रतिभा को चीन के शहर शंघाई में आयोजित एशियाई जनसंख्या फोरम की दूसरी अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में सर्वश्रेष्ठ यंग सांइटिस्ट अवार्ड से नवाजा गया। सम्मान प्राप्त कर भारत लौटे गांव हिसामडा निवासी 26 बर्षीय मोरध्वज धाकड पुत्र स्वर्गीय मुरारी लाल धाकड का उसके परिजनो व मित्रों ने स्वागत किया।इससे पूर्व यह आधा दर्जन से अधिक देशों में अपना प्रजेन्टेशन दे चुके है। 

Mordhwaj conferred with Best Young Scientist Award


मोरध्वज के ताऊ रामेश्वर दयाल धाकड ने खुशी व्यक्त करते हुये बताया कि एशियाई जनंसख्या फोरम एशियाई देशो के भविष्य में सतत विकास का निरंतर विश्लेषण तथा नीति निर्धारण का मुख्य मंच है। दूसरे अंतर्राष्ट्रीय  संगोष्ठी में एशियाई देशो के साथ पश्चिमी देशो के वैज्ञानिकों ने भी भाग लिया । मोरध्वज को यह सम्मान उनके भारत में मृत्यु दर कम करने एवं बीमारियों की समस्या के स्थायी निवारण के लिये व  भारत में औसत उम्र विकसित देशो के समतुल्य करने के लिये नीति निर्धारण के अहम सुझाव शोध पत्र  के लिये दिया गया।

Mordhwaj conferred with Best Young Scientist Award

मोरध्वज ने यह रिसर्च संयुक्त राष्ट्र संघ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं विश्व जनसंख्या कार्यक्रम के निदेशक प्रोफेसर वोल्फगांग लुट्ज,एशियाई डेमोग्राफिक रिसर्च इंस्टीटयूट के उपनिदेशक समीर के सी और जेएनयू की प्रोफेसर नंदिता सैकिआ के साथ आस्ट्रिया के विएना शहर में स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ के रिसर्च इंस्टिटयूट में 01 जून से 31 अगस्त के दौरान किया था।

Mordhwaj conferred with Best Young Scientist Award

इस शोध के लिये उस को  संयुक्त राष्ट्र संघ के रिसर्च इंस्टिटयूट वियना में कार्य करने के लिये ज्योति कीरत पारिखी की फैलोशिप भारत के इकलौते यंग साइंटिस्ट के रूप में अवार्ड हुई। इससे पहले वह कई  देशों में जाकर जनसंख्या स्वास्थ्य पर शोध कर चुके है। उनके द्धारा किये गये शोधो को अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई वैज्ञानिक सम्मेलनों में जाकर प्रस्तुत कर चुके है,वर्तमान में वह जन सांख्यिकी और जनसंख्या विज्ञान पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रहे है।  

प्रेम सिंह सैनी