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किशनगढ़। किशनगढ़ की शिक्षण संस्थाओं व रात्रि चौपाल में जयपुर के माइण्ड रूट फाउंडेशन के तत्वावधान में मानसिक स्वास्थ्य व नशे पर संबंधित जानकारी व जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। आज गुरूवार को किशनगढ़ के माहेश्वरी इंटरनेशनल स्कूल, गांव सांवतसर के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, गांव पाटन के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बच्चों व गांव तिलोनिया में हुई रात्रि चौपाल में ग्रामीणों को मानसिक स्वास्थ्य व नशे के बारे में जानकारी दी गई।


जागरूकता शिविर में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. डीएस पूनिया ने बच्चों को बताया कि लगातार बदल रही जीवनशैली, अपेक्षाओं का बोझ तथा आगे बढ़ने की होड़ में इन्सान मानसिक समस्याओं में घिर चुका है। मानसिक समस्याएं अधिकतर किशोरों में ज्यादा होती है। ऐसी समस्याएं होने पर भी वे मनोचिकित्सक के पास जाने से कतराते है। कुछ लोग तो झिझक के कारण और कुछ लोग पुरानी अवधारणाओं के कारण इलाज से दूरी बना लेते हैं। उन्होंने बताया कि गंभीर मानसिक विकारों में सिजोफ्रेनिया, हिस्टीरिया, पेनिक डिस्ऑर्डर, फोबिया, ऑर्गेनिक साइकोसिस, मिर्गी, मेनिया और गहन अवसाद से अनेक लोग पीड़ित हैं। इन पर निरंतर इलाज और नियमित ध्यान देने की आवश्यकता होती है। देश में लगभग एक करोड़ लोग मानसिक रूप से बीमार हैं। इसके लिए इलाज की उपलब्धता और इलाज के फायदे की जानकारी न होना महत्वपूर्ण कारण है। इसी के चलते राष्ट्रीय स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया गया है, ताकि निकट भविष्य में न्यूनतम मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सभी वर्गों खासकर जनसंख्या के सबसे असुरक्षित वर्गों को उपलब्ध और उस तक पहुंच हो।  


अजमेर के जिला महामारी नियंत्रण डॉ. सुरेश चौधरी ने बताया कि देवी-देवताओं का प्रकोप, भोपों आदि से इलाज, मिर्गी में अनावश्यक क्रियाएं और ओपरी आदि की बातें अक्सर मानसिक रोगी से जोड़ ली जाती हैं, जबकि इन्हें उपचार की जरूरत होती है। इन्हीं मानसिक समस्याओं से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन हर वर्ष 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। राजस्थान में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (एनएमएचपी) के तहत गांव-ढाणी व मोहल्लों में जाकर मानसिक रोगियों की न केवल तलाश कर रहा है, बल्कि अब इन्हें उपचारित भी कर रहा है। विभाग ने जिले के चिकित्सकों को इसके लिए नियमित प्रशिक्षण भी दिया जाता है ताकि मानसिक रोगियों को उपचार मिल सके। वहीं राज्य के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र (पीएचसी) पर नियमित शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि जनमानस वहां जाकर डॉक्टर से अपनी मानसिक स्वास्थ्य जांच करवाएं। स्वास्थ्य केन्द्रों पर मुफ्त जांच, उपचार एवं दवा वितरण शिविर का आयोजन नियमित किया जा रहा है। शिक्षण संस्थाओं में 1500 से अधिक बच्चों व स्टॉफ को जानकारी दी गई।  

गांव तिलोनिया में आयोजित रात्रि चौपाल में 350 से अधिक ग्रामीणों को जागरूक किया गया। डॉ. डीएस पूनिया द्वारा रात्रि चौपाल में कई जनों का इलाज भी किया। उनके साथ डॉ. रवि, किशनगढ़ के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के डॉ. आशीष व फार्मासिस्ट अक्षय ने भी मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी दी व जरूरतमंदों की काउंसलिंग की।