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श्रीगंगानगर/राज्य कर्मचारियों, अधिकारियों व पेंशनर्स को जुलाई, 2019 से देय 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता की बजट में घोषणा करने के बावजूद, सरकार के इशारे पर वित्त मंत्रालय द्वारा भुगतान के आदेश जारी नहीं करने से कर्मचारी वर्ग में राज्य सरकार के प्रति नाराजगी व्याप्त है।

अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ ने इस देरी पर रोष व्यक्त किया है। कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा ने कहा है कि केन्द्र सरकार के द्वारा अपने कर्मचारियों को यह भत्ता जुलाई, 2019 से दिया जा चुका है। केन्द्र के अनुरूप राज्य में वेतन-भत्ते बढ़ाने बाबत राज्य सरकार व कर्मचारी महासंघ के मध्य पूर्व में हुए लिखित समझौते में अड़ंगे डाले जा रहे हैं। जिस पर कर्मचारी महासंघ के जयपुर स्थित प्रान्तीय कार्यालय में 15 मार्च को तमाम विभागों के सभी कर्मचारी संगठनों की कन्वेंशन होगा, जिसमें संघर्ष की रणनीति बनाई जाएगी।


कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा ने कहा है कि सरकार के सांख्यिकी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार खाद्य सामग्री की महंगाई दर नवम्बर, 2018 में -2.61 प्रतिशत रहने की तुलना में नवम्बर, 2019 में यह दर 10.01 प्रतिशत का उछाल ले चुकी थी। इसी प्रकार खुदरा महंगाई दर पिछले तीन सालों में अब सबसे अधिक बढकर 5.54 प्रतिशत पहुंच गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इण्डिया ने मौद्रिक नीति की समीक्षा में महंगाई दर के तय किए गए अनुमान से भी कहीं अधिक महंगाई दर हो चुकी है।

कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष सतीश शर्मा ने कहा है कि इस बढ़ी हुई महंगाई के फलस्वरूप कम हुई क्रय शक्ति को पूर्वानुसार बरकरार रखने के लिए ही कर्मचारियों को महंगाई भत्ता का प्रावधान है, ना कि कोई अतिरिक्त सुविधा है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा मंत्रियों-विधायकों के वेतन-भत्तों में 200 प्रतिशत बढ़ौतरी कर देने के बाद कर्मचारियों को देय 5 प्रतिशत महंगाई भत्ता में अड़ंगे डालने से कर्मचारी वर्ग में आक्रोश फैलता जा रहा है।